Disadvantages (नुकसान):
1. ⏰ समय पर पूरी पकड़ नहीं होती
आपको ऑफिस के समय के अनुसार चलना पड़ता है, चाहे आपका मन हो या न हो।
फ्रीडम नहीं होता – छुट्टी भी बॉस की मर्ज़ी से मिलती है।
2. 💰 सीमित कमाई
सैलरी फिक्स होती है, चाहे आप कितना भी मेहनत करें।
प्रमोशन और बढ़ोतरी सालों लग जाते हैं।
3. 😓 मेंटल स्ट्रेस और बर्नआउट
लगातार काम का प्रेशर, डेडलाइन और मीटिंग्स मानसिक तनाव बढ़ाते हैं।
पर्सनल लाइफ और हेल्थ पर असर पड़ता है।
4. 🧱 Growth में रुकावट
आपको वही टास्क बार-बार करने पड़ते हैं।
Creativity और नई चीज़ें सीखने का मौका कम होता है।
5. 🧍♂️ स्वतंत्रता की कमी
अपने फैसले खुद नहीं ले सकते – हर चीज़ के लिए मंज़ूरी चाहिए।
जहाँ आपकी मर्जी से काम करना संभव नहीं होता।
6. 📉 Job Insecurity
एक नौकरी चली गई तो सारी इनकम बंद।
कंपनियां जब चाहे निकाल सकती हैं – महामारी के समय में देखा गया।
7. 💡 Entrepreneurial Potential दब जाता है
अगर आपके अंदर कोई बड़ा सपना या आइडिया है, तो उसे पूरा करने का टाइम नहीं मिलता।
जॉब आपकी क्रिएटिव एनर्जी को consume कर लेती है।
8. 🕰️ Time for Family और Passion कम होता है
परिवार, शौक, घूमना – सब बाद में आता है।
5 दिन काम, 2 दिन थकान – यही लाइफ बन जाती है।
FreelancingR
emote Work
Passive Income (Mutual Funds, Blogging, Digital Products)
Entrepreneurship
हर किसी के लिए 9-5 बुरा नहीं होता। कुछ लोगों को इससे स्थिरता मिलती है। लेकिन यह सभी के लिए सही नहीं है – खासकर जिनमें risk लेने और कुछ अलग करने की चाह हो।